इंदौर(विनोद गोयल) जिस तरह स्वर्ण को कुंदन बनाने के लिए तपाना जरुरी होता है, उसी तरह अपने मन को निर्मल और शुद्ध बनाने के लिए यज्ञ की पवित्र अग्नि का सम्पर्क शास्त्र सम्मत माना गया है। विज्ञान ने भी यज्ञ की महत्ता को स्वीकार किया है। आज सारी दुनिया प्रदूषण की चपेट में आ चुकी है। प्रदूषण कई तरह के होते हैं। प्रकृति के साथ खिलवाड़ का नतीजा भी हम सब देख रहे हैं। यज्ञ जैसी प्रक्रिया से पर्यावरण और प्रकृति का भी शुद्धिकरण होता है।
हमारे सनातन धर्म में यज्ञ को सबसे पहली विधि कहा गया है जो देवताओं के लिए आहार, भोजन और पुष्टि का काम करता है। याज्ञिक अनुष्ठान समाज को ऊर्जा और चैतन्यता प्रदान करते हैं। हमारी नई पौध को आज सबसे ज्यादा इन्हीं पौराणिक मान्यताओं से जोड़ने की जरूरत है। यज्ञ परिसर में किया गया जप, ताप, ध्यान और दान सौ गुना फल देने वाला होता है। ये प्रेरक विचार हैं तपोनिष्ठ संत, नरसिंहा एवं वृंदावन से आए महंत सुखराम दास महाराज के, जो उन्होंने बंगाली चौराहा स्थित मैदान पर चल रहे विराट लक्ष्मीनारायण महायज्ञ में शामिल यजमानों एवं अन्य श्रद्धालुओं को यज्ञ स्थल पर आयोजित धर्म सभा में आशीर्वचन देते हुए व्यक्त किए।
अरणि मंथन से प्रकट हुए अग्निदेव
प्रख्यात संत ब्रह्मलीन देवराहा बाबा के परम शिष्य महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज (आगरोद) के सानिध्य में हो रहे इस याज्ञिक अनुष्ठान में सुबह काशी के प्रख्यात यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे और उनके साथ आए अन्य विद्वानों के निर्देशन में यज्ञ के मुख्य यजमान अनिल पाटीदार ने सपत्निक अरणि मंथन की प्रक्रिया प्रारंभ की। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जैसे ही अरणि मंथन से अग्नि देव का प्राकट्य हुआ, समूचा यज्ञ स्थल अग्नि नारायण, यज्ञ देवता, लक्ष्मीनारायण और अन्य देवी-देवताओं के जयघोष से गूंज उठा। अरणि मंथन से प्राप्त अग्नि को विधि-विधान के साथ सभी 51 यज्ञ कुंडों में समर्पित की गई। करीब 2 घंटे चली इस प्रक्रिया के पश्चात यज्ञ शाला में स्वाहाकार की मंगल ध्वनि का शुभारंभ हुआ
श्रद्धालुओं ने की यज्ञशाला की परिक्रमा
इसके साथ ही यज्ञ शाला की परिक्रमा भी प्रारंभ हो गई जो सुबह से लेकर देर शाम तक चलती रही। पहले दिन यहाँ कोई 5 हजार श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर फलाहार एवं प्रसादी का पुण्य लाभ उठाया। विधायक महेंद्र हार्डिया, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष जयपाल सिंह चावड़ा, पाटीदार समाज इंदौर महानगर के अध्यक्ष मनोहर पाटीदार, समाजसेवी राधेश्याम शर्मा गुरूजी, शालिग्राम व्यायामशाला खजराना के मोहन पहलवान ने भी यज्ञ स्थल पहुंचकर दर्शन पूजन का पुण्य लाभ उठाया।
आयोजन समिति के प्रमुख देवव्रत पाटीदार एवं अलकेश सुलिया ने बताया कि शाम को सभा मंडप में नरसिंहा एवं वृंदावन आश्रम से पधारे।
यज्ञ मंडल प्रत्येक बांस-बल्ली पर देवताओं का वास
तपोनिष्ठ संत सुखराम दास महाराज के साथ निर्मोही अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी केशवदास महाराज, बद्रीनाथ धाम से महंत गोविन्ददास, महामंडलेश्वर भरतदास महाराज, फौजी बाबा रामकृपाल दास, हरिद्वार के महंत रामदास, वृंदावन के मनमोहन दास, महंत रघुनाथ दास, महंत विजय दास आदि ने यज्ञ में शामिल युगलों को यज्ञ की महिमा बताई। उन्होंने कहा कि यज्ञ मंडल की परिक्रमा इसलिए भी सौभाग्यशाली मानी गई है कि इसकी प्रत्येक बांस-बल्ली पर देवताओं का वास होता है और यज्ञ मंडल की परिक्रमा को सम्पूर्ण ब्रह्मांड की परिक्रमा के समान माना गया है। इस मौके पर बड़ी संख्या में मालवांचल के अनेक प्रमुख धर्मस्थलों के संत-महंत भी शामिल हुए। धर्म सभा में सभी संतों ने देवी अहिल्या की इस नगरी में 20 वर्षों बाद हो रहे 51 कुण्डीय इस महायज्ञ के अनुष्ठान को सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय बताते हुए सभी श्रद्धालुओं, यजमानों एवं मालवांचल के नागरिकों के लिए कल्याणकारी बताया।
100 से अधिक तरह की औषधियों से हवन
महायज्ञ में गाय के शुद्ध घी, गोबर के कंडों, पलाश, चन्दन, वट, पीपल एवं आम की लकड़ी सहित 100 से अधिक तरह की औषधियों, वनस्पति एवं जड़ी-बूटी से निर्मित समिधा एवं तिल, जौ, चावल, खांड, कमलगट्टा, सफ़ेद एवं लाल चंदन, बेल्वपत्र, भोजपत्र, गूगल आदि का प्रयोग होगा। 20 वर्ष पूर्व इस तरह का महायज्ञ दशहरा मैदान पर देवराहा बाबा की प्रेरणा से आयोजित हुआ था। उसके बाद अब यह अनुष्ठान हो रहा है। यज्ञ प्रतिदिन सुबह 7.30 बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 12 बजे तक और फलाहार के पश्चात दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक जारी रहेगा। शाम 5 बजे देश के विभिन्न तीर्थस्थलों से आए संत विद्वानों के सानिध्य में धर्म सभा होगी। यजमानों के लिए दोपहर में विश्राम की व्यवस्था भी यज्ञशाला के दोनों ओर तम्बू लगाकर की गई है। परिक्रमा मार्ग पर भी कारपेट एवं अन्य व्यवस्थाएं की गई है।
भक्तों से दाल चावल लाने का आग्रह
महंत कृष्ण गोपाल दास महाराज एवं यज्ञाचार्य पं. पुष्कर पांडे ने बताया कि यज्ञ में प्रतिदिन करीब 2.50 लाख आहुतियाँ यजमान युगलों द्वारा प्रदान की जा रही है। यज्ञ में शामिल होने वाले यजमान परिवारों, परिक्रमा करने वालों और यज्ञ की व्यवस्था में प्रत्यक्ष – अप्रत्यक्ष रूप से भागीदार बनने और सहयोग करने वालों के कल्याण के उद्देश्य से किए जा रहे इस महायज्ञ की पूर्णाहुति 14 जनवरी मकर संक्रांति को अपराह्न 4 बजे होगी। उसी दिन यज्ञ स्थल पर विशाल भंडारा भी होगा जिसमें प्रतिदिन अपने साथ घरों से एक पाव मूंग की दाल और एक पाव चावल से निर्मित खिचड़ी प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
इस तरह अब तक 13 क्विंटल दाल चावल का संग्रह एकत्र हो चुका है। यह प्रक्रिया 14 जनवरी तक चलेगी। यज्ञ शाला में ब्रह्मा और प्रधान कुंड सहित 51 कुंड बनाए गए हैं। यज्ञ शाला के साथ ही परिक्रमा मार्ग, कार्यालय, संत निवास, अतिथि निवास एवं यजमानों के लिए विश्राम स्थल सहित अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराई गई हैं। यज्ञ स्थल पर प्रवेश निशुल्क रहेगा। परिक्रमा का क्रम जारी है जो पूरे समय चलेगा। अब तक यहाँ आसपास के 50 गांवों के 5 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुँच चुके हैं।


