मां नर्मदा, जिसे भौतिक जगत में नदी कहा जाता है। लेकिन जब इसे आध्यत्मिक रूप से देखा जाता है तो मां नर्मदा जीवन को बदलने वाली आत्म शुद्दि स्वरूपा दिखाई
आइए आज हम बात करते है राजस्थान के एक ऐसे अनोखे मंदिर की जहां भगवान कृष्ण भक्तों पर सिर्फ कृपा ही नहीं बरसाते अपितु भक्तों के बिजनेस पार्टनर बन जाते
खजराना गणेश जी इंदौर में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे रानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1735 में बनवाया था। इस मंदिर के गणपति स्वयंभू (स्वयं प्रकट हुए) माने जाते हैं,
Surajkund Kumbhalgarh अरावली की गोद में बसा सुरजकुंड, कुम्भलगढ़ — जहाँ प्रकृति और अध्यात्म का संगम है। पांडवकालीन कुंड, दत्तात्रेय भगवान का स्थल और श्री अवधेश चैतन्य ब्रह्मचारी जी महाराज
राजस्थान, राजसंमंद जिले में कुंभलगढ़ के निकट ही स्थित है सुरजकुंड एक दैविक प्राकृतिक स्थल जहां पहुंचना तो आमजन के लिए आसान नहीं है लेकिन इस स्थल तक पहुंचने के
भारत भर से लाखों तीर्थयात्री हर साल नर्मदा नदी की पूजा और परिक्रमा करने के लिए मध्य प्रदेश आते हैं। ग्राम पंचायतों में प्रवेश करते समय उन्हें तीर्थयात्री के रूप
मां नर्मदा के आंचल में संत अवधेश चैतन्य महाराज ने 3000 हजार किलोमीटर की परिक्रमा का आगाज किया है। संत श्री ने ओंकारेश्वर में मां नर्मदा के निकट रह कर
कांग्रेस सत्ता में तो नहीं है लेकिन इतने साल विपक्ष में रहने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं में शालिनता नहीं आई। पद और पार्टी को तवज्जों देने वाले चिंटू
भारत में एक ऐसी नदी है जिसका धार्मिक महत्व काफी बड़ा है. लोग इसकी परिक्रमा करते हैं. इस नदी का नाम नर्मदा है जो मध्य प्रदेश से निकलती है. ये
We are living in a sacred transition — a Yug Sandhi, the meeting point between the end of one age and the birth of another. Just as night gives way










