नर्मदा तट के सौंदर्य का वर्णन कभी करते-करते इतिहासकार थक जाते थे। जो नर्मदा कभी शांत तो कभी रोद्र रूप दिखाती हुई अपनी सीमाओं में रहने के लिए प्रसिद्ध रही
राजस्थान के राजसंमद जिले की कुंभलगढ़ तहसील में स्थित सुरजकुंड दिव्य धाम के संतश्री अवधेश चेतन्य बह्मचारी महाराज की नर्मदा परिक्रमा को लगभग 16 दिन हो चुके है। यात्रा 17
नर्मदा परिक्रमा वैसे तो हर वर्ष देवउठनी एकादशी से शुरू होती है। जिसे पहले तो साधु संत ही किया करते थे। लेकिन वर्तमान में नर्मदा परिक्रमा एक एडवेंचर में भी
यह यात्रा न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक स्तर पर भी भक्तों को मजबूत बना रही है, जहां प्रकृति की गोद में नर्मदा मां के दर्शन से आत्मा की
आज की यात्रा बालाजी रोकड़ा हनुमान मंदिर से शुरू हुई, जो राजघाट के निकट स्थित है। यहां से आगे बढ़ते हुए दाता श्री और उनके साथी भक्तों ने दिगंबरदास बाबा
महाराज जी की यह यात्रा न केवल व्यक्तिगत साधना का उदाहरण है, बल्कि हजारों अनुयायियों को प्रेरित भी कर रही है। नर्मदा परिक्रमा की परंपरा प्राचीन है, जहां भक्त नदी
पवित्र नर्मदा नदी की परिक्रमा में संलग्न दाता श्री की यात्रा का 13वां दिन अत्यंत उत्साह और भक्ति से भरपूर रहा। इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत मध्य प्रदेश के लोहारा
पुराणों के अनुसार, इस परिक्रमा को 12 करोड़ अन्य पवित्र स्थलों की परिक्रमा के बराबर पुण्यदायी माना जाता है, जो इस यात्रा की महानता को बढ़ाता है। मध्य प्रदेश और
सूरजकुंड धाम, राजस्थान से प्रारंभ हुई दाता श्री अवधेश चैतन्य जी महाराज की नर्मदा परिक्रमा अपने 11वें दिन में प्रवेश कर गई है। आज, 17 नवंबर 2025 को यह आध्यात्मिक
विश्व की एकमात्र नदी है मां नर्मदा जिसकी परिक्रमा की जाती है। लेकिन प्रश्न यह उठता है कि जब नदीं उल्टी दिशा में बहती है तो उल्टी दिशा में बहने










